मेरे पाँव में ग़ाव थे।
मेरे पाँव में ग़ाव थे।
जब मैं बैठी थी वहाँ,
आपके साथ...
आपने कहा था —
"खड़ी हो जाओ...
आगे बढ़ जाओ..."
मैं खड़ी हो गई,
और बढ़ गई आगे...
पर आज जब पलट कर देखा —
हम वहीं बैठे थे।
मन के एक कोने में...
वही बैठे थे,
और उम्मीद से भरी
मेरी आँखें
अब भी आपको देख रही थीं।
फिर आपने कहा —
"खड़ी हो जाओ,
और चलो मेरे साथ..."
पर मैं खड़ी नहीं हो पाई।
मेरे पाँव में ग़ाव थे।
~स्वाति

