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bezubaan Stories

Classics

4  

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अनकही पर प्यारी ✨

अनकही पर प्यारी ✨

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4

कर दिया उनको अलविदा... प्रेम से...
हाँ, उनको नहीं है पता...

जाना था कहीं दूर शाम को उनके संग,
अंडमान के जंगलों में या रोम की गलियों में...
पर फिलहाल वो खुश हैं किसी और के संग...

यही तो चाहते थे हम...
हाँ, हम दोनों ही ये चाहते थे...

पर अब ख़ाली सा लगता है...
कितने और दिन लगेंगे, बस ये सोचना है...

अपने काम में मशगूल हूँ...
पर खयाल उन्हीं का रहता है...

आए थे वो मिलने बार-बार...
पर वजह नहीं थी कोई उनके पास...
बेमतलब-सी बातें करने आते थे...
और बेवजह मैं भी मिलने लगी फिर उनके साथ...

पर अब ये सिलसिला होगा कम
या कभी भी न हो...
यही तो चाहते थे हम...

एक ख़ाली-सी जगह बच गई है...
जहाँ कहीं हमने अपनी छोटी-सी कहानी लिखी थी...
अधूरी... अनकही पर प्यारी... 💖🌙


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