STORYMIRROR

AVINASH KUMAR

Romance

4  

AVINASH KUMAR

Romance

मेरे ख़्वाब की वजह

मेरे ख़्वाब की वजह

1 min
392

कल मेरे ख़्वाब की वजह बता दी उसने

फिर मेरे जीने की आस जगा दी उसने


सुर्ख आंखों से बहे शबनमी मोती उसकी

यूँ नज़र हम से मिला फिर झुका ली उसने


अपनी परेशानी का दिया बुझा दिया उसने

इस कदर मासूम खता की उसने


अपने जज़्बात का इज़हार किया जब उसने

अपनी पायल को पायल से बजा दी उसने


अपने आँचल में लिए हुस्न को वो सहमी थी

इस तरहा अपनी मासूमियत बता दी उसने


उसके प्रार्थना में बसी ये कैसी खुशबू

जिस से महका दी मेरी रूह तक उसने


मैंने पूछा जो मेरे प्यार की उम्र है कितनी

सितारों की तरफ उंगली उठा दी उसने


खुद में मदहोश है वो दीवानी हुई जाती है

मुझको ये राज की बात बता दी उसने।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance