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Sangeeta Agarwal

Tragedy

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Sangeeta Agarwal

Tragedy

मेरा कुसूर क्या है?

मेरा कुसूर क्या है?

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नन्ही सी कली थी

मिश्री की डली थी

नाज़ों में पली थी

सपनों के पंख सवार

'पी'के घर चली थी।

सब का दिल जीत लिया

अपना सर्वस्व दिया

कुछ सहन कर,कुछ नजरअंदाज कर

सारा किला फ़तह किया

एक दिन क्या गज़ब हुआ

मासूमियत का कत्ल हुआ

शिकार हुई अनजानी हवस का

उसका भला क्या कुसूर हुआ

पहले क्या कम टूटी थी

पल पल के तानों से मर मर के जीती थी

अपनों की सच्ची सहानुभूति

उसकी संजीवनी थी

न कभी मिलनी थी ये

न उसने ही पायी

सीता हो या पांचाली

सबकी व्यथा सांझी थी

कह के अलविदा एक दिन

निष्ठुर समाज को

चल पड़ी वो आखिरी डगर

छोड़ एक भटकी आत्मा को

जो आज भी इंसाफ चाहती है

मेरा कुसूर बताओ

समाज के ठेकेदारों

बच नहीं पाओगे

लौट फिर आओगे

कल पराया जान सताया था

लो आज तुम्हारा नंबर आया है

आज तुम्हारा नंबर आया है।।



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