मेरा गुलाब....
मेरा गुलाब....
बरसात हो रही हो किन मिन सी
हल्की सी रोशनी
मद्धम सा अंधेरा
आधी ढली हुई सी शाम,
गर्मी के मौसम की ठंडी सी हवा हो,
और तेरी याद आ जाए ,नही
काश तू ही आ जाए कहीं से
चाय का मग लिए मेरी
बालकनी में, उसी गुलाब के
पौधे के पास,
जिन गुलाबो में,
मैं तुझे निहारा करता हूं
और वो अपनी पंखुड़ियां
छटका देते हैं तुम्हारी
तारीफ सुन कर, आज उन्हें भी
देख लेने दो मेरे गुलाब को,
काश तू आ ही जाए कहीं से।

