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Meera Parihar

Inspirational

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Meera Parihar

Inspirational

मेरा देश

मेरा देश

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सारे जहां से अच्छा, मित्रो हिंदुस्तान हमारा।

एक सौ छत्तीस करोड़ छत्तीस लाख जन।

भारत देश हमारा है सारी दुनिया से न्यारा ।

जिसके हृदय समा गया यह संसार सारा।।


चार दिशाएं गातीं नित नव उषा प्रभात की फेरी।

शिखरों पे निखरे सूरज हीरक सा शुभ्र उजेरी।।

कालिंदी के हृदय पटल हँस करतीं रश्मि नर्तन।

देखूँ सुबह बनारस देखूँ शाम अवध की चेरी।।1


जाफरान कश्मीर सेब की झीलों वाली घाटी।

जन्नत यह पृथ्वी पर डोगरी, उर्दू की परिपाटी।।

पग प्रक्षालन करें भूमि का सिंधु उत्ताल तरंगें।

चंदन सम मस्तक रख मानव पूजे अपनी माटी।।2


गंगा जमुना सिंधु ब्रह्मपुत्र अनगिन बहती हैं यहाँ नदियाँ।

कल कल कर किल्लोल शिशु सम मग्न प्रपात उर्मियाँ ।।

भ्रमण भूमि पर सतत हरीतिमा देकर करें समर्पण।

मिलें सभी सागर तट जा भेद न कोई रहे दर्मियाँ।।


वीर शिवाजी राणा गोबिंद गुरु की अथक कहानी।

वेद पुराण अजान शास्त्र घर घर गुंजित गुरुवानी।।

चारों वेद पुराण नक्षत्र ज्योतिष ज्ञान हमारी थाती।

शुचिता शील धृति क्षमा हमारी माताएं सिखलातीं ।।


भारत ऐसा देश जहाँ पर सारे मौसम आते-जाते।

खेत और खलिहान बहुत से धन- धान्य उपजाते।।

सिंचित करते मेघ बरस कर भूमि मातृ तुल्य को।

आबादी का पोषण होता जो जन्म यहाँ पर पाते।। 


देश हमारा हमको 'मीरा' दिल जान से प्यारा।

सारे जहां से अच्छा मित्रो हिंदुस्तान हमारा।।



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