Nand Kumar
Children
श्रम में तन्मय मैं मधुमक्खी,
फूल फूल पर जाती हूं।
फूलों का रस लेकर उससे,
मधुमय शहद बनाती हूं।
स्वयं न खाती तुम्हें खिलाती,
पर क्या तुमसे पाती हूं।
उजड़ा घर शिशु मरे हुए ,
बस यही देख पछताती हूं ।
मां
महाकुंभ
दो युवा नयन ज...
बुजुर्गों का ...
नदियां
लोकतंत्र का म...
सृजन
मां जन जन का ...
हमारा मित्र
संगठन में शक्...
उस देवी को करता हूँ नमन बारंबार, उसके चरणों मे अर्पित धवल पुष्पहार। उस देवी को करता हूँ नमन बारंबार, उसके चरणों मे अर्पित धवल पुष्पहार।
दादी के सीने से लग बिन तकिए सोया रहता था। दादी के सीने से लग बिन तकिए सोया रहता था।
मम्मी उठकर धौंस जमाए, स्कूल जाओ बस यही रट लगाए, मम्मी उठकर धौंस जमाए, स्कूल जाओ बस यही रट लगाए,
हमे जीने की राह दिखाया हमे जीने की राह दिखाया
सीधे मुहं तुम भाग जाओ ना, बहुत हुआ तुम्हारा ये कहर कोरोना सीधे मुहं तुम भाग जाओ ना, बहुत हुआ तुम्हारा ये कहर कोरोना
दरवाजे हर रोज अनगिनत बार चौखट से गले मिलते हैं। दरवाजे हर रोज अनगिनत बार चौखट से गले मिलते हैं।
पर ये साइकिल सारी गाड़ियों पर भारी है, क्योंकि ये हमारे पापा की मनपसंद सवारी है। पर ये साइकिल सारी गाड़ियों पर भारी है, क्योंकि ये हमारे पापा की मनपसंद सवारी ह...
न जाने कब हमारी नींद खत्म हो गई न जाने कब हमारी नींद खत्म हो गई
चालीस डिग्री तापमान है जिस्म से टपक रहा पसीना भट्टी सा घर तपता अपना मुश्किल है चालीस डिग्री तापमान है जिस्म से टपक रहा पसीना भट्टी सा घर तपता अपना ...
जब तक है दोनों मिलते रहेंगे मुंडेर में हाँ यूँ ही मुंडेर में। जब तक है दोनों मिलते रहेंगे मुंडेर में हाँ यूँ ही मुंडेर में।
छत या आंगन में पानी रखकर चिड़ियों की प्यास बुझाओ तुम। छत या आंगन में पानी रखकर चिड़ियों की प्यास बुझाओ तुम।
आज वो डरना नहीं चाहती उसने अंडे दिए हैं आज वो डरना नहीं चाहती उसने अंडे दिए हैं
नन्हा सा अंकुर "मातृ रूपी धरा" पर' फूटा' नव जीवन संचार हुआ. नन्हा सा अंकुर "मातृ रूपी धरा" पर' फूटा' नव जीवन संचार हुआ.
आओ, अपने अंदर के कोलंबस को जगाएं बचपन की दुनिया ढूंढ लाएं ! आओ, अपने अंदर के कोलंबस को जगाएं बचपन की दुनिया ढूंढ लाएं !
ताउम्र बच्चों के लिए जीता है ताउम्र बच्चों के लिए जीता है
पर मुझे कहीं भी चैन ना आता वह आता बस मां के पास। पर मुझे कहीं भी चैन ना आता वह आता बस मां के पास।
रंगों का त्यौहार है आया खुशियाँ ही खुशियाँ लाया। रंगों का त्यौहार है आया खुशियाँ ही खुशियाँ लाया।
"माना न सोये, बहुत रोये, सघन तम में, सोख ली, जितनी भी थी, अगन तम में" "माना न सोये, बहुत रोये, सघन तम में, सोख ली, जितनी भी थी, अगन तम में"
ऐसे तो हो जाएगा इंसानों का सफाया ऐसे तो हो जाएगा इंसानों का सफाया
बच्चे की कही एक बात है माँ। बहु के लिए है सास ही माँ। एक बेटी की स्वास है माँ। जीवन है माँ से, जीना... बच्चे की कही एक बात है माँ। बहु के लिए है सास ही माँ। एक बेटी की स्वास है माँ। ...