STORYMIRROR

bhavi tiwari

Romance Tragedy

4  

bhavi tiwari

Romance Tragedy

मौत

मौत

1 min
363

जाते हुए उसने एक बार जो पलट के देखा

कहने को सांसे चलती रही इस बेजान की


कोई देख न पाया आंखोंं से बहती अश्रु रेखा

हक था ही नही के उसे रोक पाते


 उसे जाने ना देते 

जिस्म से जान बूंद बूंद निकलती रही 


अभी भी एक छटाक जान लिए राह में पड़ी रही

कितना अच्छा होता के वो मिलता ना कभी


हार जाते जिंदगी की बाजी हम सो गए होते तभी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance