STORYMIRROR

Surendra kumar singh

Abstract

4  

Surendra kumar singh

Abstract

मौसम का रंग

मौसम का रंग

1 min
416

मौसम का रंग

हवा सी आँख

उम्मीद सी आवाज

लहर से विचार

गन्ध सी देह


चाहत सी बाँहें

उत्साह से लहराते हुये बाल

कल्पबृक्ष सा आँचल

जिंदगी है या खुदा का घर

कोई कहाँ जाये जिंदगी


तुम्हारी आकर्षण की शक्ति से

उलझकर

कोई कहाँ जाये

रस बरसती चांदनी से दूर।


हम तो सदियों से तुम्हारे थे

और रहेंगे तुममें सदियों तक।

नया प्रेम है

हमारा तुमसे


तुम्हारा हमसे

शास्त्र भी है

शस्त्र भी है

एक दम आधुनिक।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract