मैं क्यों लिखता हूं
मैं क्यों लिखता हूं
मैं कहां लिखता हूं,
कोई लिखा लेता है।
हम तो कठपुतली है,
कोई खिला लेता है।
एक अजीब सी,
स्थिति निर्मित होती है।
लेखनी लिखने को,
विवश होती है।
कुछ ऐसी परिस्थितियां,
बनती है।
अंदर का अहसास,
कविता की पंक्तियां
सी बनती है।।
