Kajal Pandit
Romance
पता है तुम्हें,
कभी-कभी सोचती हूं,
काश ! ऐसा होता
ये जो कंधे पे इतनी जिम्मेदारियां हैं न,
जब अकेली पड़ जाती मैं कभी,
और पीछे से आकर,
धीरे से मेरे कंधे पे हल्की सी थपकी देकर,
तुम कहते,
मैं हूं न ....!!!
तुम
कोरोना आया
......फिर तुम...
लहरें
ये मोहब्बत तो...
तुम कहां थे
मैं हूं न
वो मैं हूं
मुझसे बात किय...
वो हर रात ख्वाब बनकर मेरी आँखों में उतर आता है वो अब भी क्यों अहसास बनकर मेरी साँसों म वो हर रात ख्वाब बनकर मेरी आँखों में उतर आता है वो अब भी क्यों अहसास बनकर मेरी...
जिसमें दुनिया की सारी खूबसूरती समाहित है जो एक ऐसा दर्पण है! जिसमें दुनिया की सारी खूबसूरती समाहित है जो एक ऐसा दर्पण है!
चलो आज बहुत से वादे करते हैं , कुछ निभाने, कुछ तोड़ देने के इरादे से। चलो आज बहुत से वादे करते हैं , कुछ निभाने, कुछ तोड़ देने के इरादे से।
मिले थे जिस ख़याल से फिर वो ख़याल लें चले मिले थे जिस ख़याल से फिर वो ख़याल लें चले
हो हमसफ़र से ओझल चुपके से एक रूमाल थमा गई। हो हमसफ़र से ओझल चुपके से एक रूमाल थमा गई।
प्रेम क्या होता है यह तो दो प्रेम करने वाले दिल ही बेहतर जाने प्रेम क्या होता है यह तो दो प्रेम करने वाले दिल ही बेहतर जाने
करके देखो मोहब्बत हमसे , मोहब्बत की हर अदा मिलेगी! करके देखो मोहब्बत हमसे , मोहब्बत की हर अदा मिलेगी!
चाहत की मंजिल जीवन की सौगात प्रिये तेरे ही मिल जाने से हो जीवन उद्धार प्रिये।। चाहत की मंजिल जीवन की सौगात प्रिये तेरे ही मिल जाने से हो जीवन उद्धार...
तुम्हें कैसे पता उसका, मेरे मन की जो दुविधा हैं कि पूरा होने की चाहत में, तुम्हें कैसे पता उसका, मेरे मन की जो दुविधा हैं कि पूरा होने की चाहत में,
जिसके लिए मैं कभी, यूँ दीवाना था जैसे बरसते मौसम का, आवारा बादल जिसके लिए मैं कभी, यूँ दीवाना था जैसे बरसते मौसम का, आवारा बादल
कोई तर्क न देना आज बहते हुये मेरे अल्फ़ाज़ों पर बस दो घड़ी पास। कोई तर्क न देना आज बहते हुये मेरे अल्फ़ाज़ों पर बस दो घड़ी पास।
चोट जो लगी है दिल पर, प्यार की मरहम तो लगा दो, चोट जो लगी है दिल पर, प्यार की मरहम तो लगा दो,
तर्पण में अर्पण में, शीशे में दर्पण में, तीर में कमान में, तर्पण में अर्पण में, शीशे में दर्पण में, तीर में कमान में,
किताबों में छुपा गुलाब मौन, तुम्हारी कहानी सुनाता रहा। किताबों में छुपा गुलाब मौन, तुम्हारी कहानी सुनाता रहा।
बातें तो हो रही, अब जज्बात नहीं रहे साथ होकर भी हम अब साथ नही रहे. बातें तो हो रही, अब जज्बात नहीं रहे साथ होकर भी हम अब साथ नही रहे.
कभी अध्यापक हैं किताबें कभी प्रचारक बन जाती हैं। कभी अध्यापक हैं किताबें कभी प्रचारक बन जाती हैं।
खामोश रहकर भी इश्क को बदनाम करते हैं कुछ लोग, हम बदनामी से नहीं डरते हम तो फिदा हैं उ खामोश रहकर भी इश्क को बदनाम करते हैं कुछ लोग, हम बदनामी से नहीं डरते हम तो फ...
इस बढ़ती जवानी में कोई किसी को पसंद भी करेगा कभी सोचा भी नहीं था हमने। इस बढ़ती जवानी में कोई किसी को पसंद भी करेगा कभी सोचा भी नहीं था हमने।
करोगी प्यार जो मुझसे मेरा एहसान करोगी ,सफर में चलके रास्ता मेरा आसान करोगी! करोगी प्यार जो मुझसे मेरा एहसान करोगी ,सफर में चलके रास्ता मेरा आसान करोगी!
तुम भी बहुत सारी चीजें हम से खुलकर कह नहीं पाती हो तुम भी बहुत सारी चीजें हम से खुलकर कह नहीं पाती हो