STORYMIRROR

डिंपल कुमारी

Tragedy Children

3  

डिंपल कुमारी

Tragedy Children

मैं एक मुरझाया सा फूल

मैं एक मुरझाया सा फूल

1 min
229

मैं एक मुरझाया सा फूल

      जिसकी मिट गयी खुशबू

मैं एक मुरझाया सा फूल

 फीके पड़े गए मेरे पंखुड़ियों पर

     सुनहरे रंगों की काया

मिट गईं मेरे शहद के रस की बूंद

मैं एक मुरझाया सा फूल

   मैं भी आया था बनने एक बाग का हिस्सा

सभी रंगों के साथ अपना रंग निखारने

पर रौंदते हाथों ने तोड़ा मुझे

  कर दिया अलग मुझे

नष्ट करके मेरे जीवन को

मैं एक मुरझाया सा फूल

    



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy