मासूम चेहरा
मासूम चेहरा
छोटा सा तो हूँ..
मासूम हूँ..प्यारा हूँ !
अपनी गरीबी का मारा हूँ !
आँखो मे आँसू है..मेरे तो क्या;
किसी की आँखो का तारा हूँ !
अभी मेरे दोनों हाथ छोटे हैं !..
फिर भी कमाने की ताकत रखता हूँ !
मेरी गरीब माँ..काम करके मुझे पढ़ाती
पर में सोचता हूं..हर दिन
मेरा बाप भी तो बड़ा आदमी था;
क्यों मेरी माँ को छोड़ गया होगा;
इज्जत तो उसमे भी थी फिर वो क्यों ?
मेरी माँ को बेइज्जत कर गया !
क्या गुनाह था उसका ..जो अकेला
अपनी ज़िंदगी जीने को छोड़ गया !
रिश्ता निभाना नहीं तो बनाना भी नहीं चाहिए !
एक विश्वास होता है..किसी का किसी पर;
क्यों तोड़ जाते है..तन्हा राहो में;
मेरी माँ की गलती क्या थी;
उसने मुझे जनम दिया ;
मुझे पाला-पोसा इस लायक बनाया;
कि सिफऀ में अच्छा आदमी बन जाऊ !
आज माँ का अच्छा बच्चा
बनने की कोशिश कर रहा हूँ;
कल बन कर भी दिखाऊगा !
पर आॅखो में आँसू इस बात का हैं;
क्यो इंसान इतना नीचे गिर जाता हैं;
कि भुगतना किसी ओर के दिल को होता हैं !

