Raghav Dixit
Classics Inspirational Others
बड़ी से बड़ी उलझनएक पुचकार सेसुलझा देती है,दर्द में देखमाँ नज़रें उतार देती है…!
माँ
संविधान हूं म...
बाप का प्रेम
लड़की
दशहरा
एक अनुभव माँ ...
ये चाहा नहीं ...
प्रेम की, भीख...
बचपन के दिन
गुंडे चमक गए
ये ख्वाब भी क्या खूब हैं बिन कहे बिन सोचे चुपके से आ जाते हैं। ये ख्वाब भी क्या खूब हैं बिन कहे बिन सोचे चुपके से आ जाते हैं।
मानव को मान दे जहां नया बनाऐंगे, बहस जारी है, बहस जारी है।। मानव को मान दे जहां नया बनाऐंगे, बहस जारी है, बहस जारी है।।
अपने ही मन का है तिमिर लौ उस खण्डहर में उभरी। अपने ही मन का है तिमिर लौ उस खण्डहर में उभरी।
हम आहें भर रहे हैं, हम आहें भर रहे हैं-(३) तुम्हें याद करते करते, तुम्हें याद करते करत हम आहें भर रहे हैं, हम आहें भर रहे हैं-(३) तुम्हें याद करते करते, तुम्हें याद...
जो ख़ुशी मिली सब धूल हो गई स्त्री जीवन क्यों दुखों का ढेर बन गया जो ख़ुशी मिली सब धूल हो गई स्त्री जीवन क्यों दुखों का ढेर बन गया
तू लिख लेना, मेरा नाम ओ दिल पर यार। तू लिख लेना, मेरा नाम ओ दिल पर यार।
धड़कनें मानो थमी थमी है मेरी। ऐसा लगता है जैसे….सबसे बड़ी गलतफहमी है मेरी। धड़कनें मानो थमी थमी है मेरी। ऐसा लगता है जैसे….सबसे बड़ी गलतफहमी है मेरी।
तुम्हारे हर समस्या का समाधान जिसमें बताया गया है कर्म को ही प्रधान ! तुम्हारे हर समस्या का समाधान जिसमें बताया गया है कर्म को ही प्रधान !
तेरी हर गीत, हर शब्द आज भी जुबान पर है और कौन भूल सकता है ? तेरी हर गीत, हर शब्द आज भी जुबान पर है और कौन भूल सकता है ?
अबके सावन में कहीं बाढ नहीं आ जाये बढ़ते हैं अब लोग भी 'अश्क' बहाने वाले। अबके सावन में कहीं बाढ नहीं आ जाये बढ़ते हैं अब लोग भी 'अश्क' बहाने वाले।
रहता संपूर्ण, सभी उद्देश्य को करते है धारण, यही कहलाता है उद्देश्य। रहता संपूर्ण, सभी उद्देश्य को करते है धारण, यही कहलाता है उद्देश्य।
कलयुग के अवतारी है कोमल थीं ना कमजोर कभी तू । कलयुग के अवतारी है कोमल थीं ना कमजोर कभी तू ।
वतन के हित में सतत् ही रत, मेरा सभी जनों को है नमन। वतन के हित में सतत् ही रत, मेरा सभी जनों को है नमन।
न दुनिया बदलेगी न इसकी स्त्रीयों के लिए परिभाषा में बदलाव किया जाएगा। न दुनिया बदलेगी न इसकी स्त्रीयों के लिए परिभाषा में बदलाव किया जाएगा।
आओ हम सब मिलके एक कदम उठाए और कोरोना को दूर भगाए। आओ हम सब मिलके एक कदम उठाए और कोरोना को दूर भगाए।
लाख आपदाएं सिर पर हो, मैं बँधन को नहीं लिखता। लाख आपदाएं सिर पर हो, मैं बँधन को नहीं लिखता।
एक ही शख़्स से इश्क़ हो जाता है बार-बार। एक ही शख़्स से इश्क़ हो जाता है बार-बार।
जीवन हमारा संवार माँ तू हमको सम्भाल ले आज माँ तू। जीवन हमारा संवार माँ तू हमको सम्भाल ले आज माँ तू।
चलो तुम्हें सस्ते एडवेंचर का नशा कराते हैं आओ बस से तुम्हे पहाड़ घुमाते हैं। चलो तुम्हें सस्ते एडवेंचर का नशा कराते हैं आओ बस से तुम्हे पहाड़ घुमाते हैं।
तना औ' डाली है' सीख देती रखें सदा जड़ से' मूल नाता।। तना औ' डाली है' सीख देती रखें सदा जड़ से' मूल नाता।।