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Kumar Gaurav Vimal

Abstract

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Kumar Gaurav Vimal

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मां

मां

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तेरी ममता को बयां कर सके,

मेरे कलम की इतनी औकात नहीं..

ए मां तेरे जैसी इस दुनिया में,

किसी और में भी वो बात नहीं..

स्याही कैसे मोल लगाए,

उन आसुओं का को तूने बहाए..

कैसे भार कोई शब्द उठाए,

उन दुआओं का जो तूने मनाए..

कर भी दे गर ये कोशिश,

फ़िर भी रहेगी उसमे वो जज़्बात नहीं,

तेरी ममता को बयां कर सके,

मेरे कलम की इतनी औकात नहीं!


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