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Sudha Adesh

Inspirational

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Sudha Adesh

Inspirational

माँ

माँ

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अंबुधि सी अपार,

अंबर सी असीम,

अवनी सी अविकल,

अंशुमाली की अंशु सी

अर्चनीय है माँ।


अक्षि में समाया

ममता का सागर,

आँचल से उलीचता

आशीर्वाद,

हस्त देते अभयदान,

देवी सी अलौकिक,

अपूर्व है माँ ।


सुरसरिता,सूर्यसुता,

सरस्वती का संगम,

ईर्ष्या, द्वेष से दूर,

सद्भावना का किया सदा संचार,

ख़ुशियों के इंद्रधनुष छितराती,

अनोखी है माँ ।


कर्म ही पूजा मूलमंत्र जिसका,

सर्वधर्म संम्भाव संदेश,

वसुधैवकुटुम्बकम आदर्श,

पूजा की आरती जैसी

अनाविल है माँ ।


माँ सा अच्छा, माँ सा सुंदर,

माँ से अपना, जग में कोई नहीं,

माँ नहीं तो कोई नहीं,

संपूर्णता का अहसास कराती,

अनूठी है माँ ।


रिश्तों की पहचान कराती

अजनबियों को भी

अपना बनाने की शिक्षा देती,

सहनशीलता का ओढ़े दुशाला

असीम है माँ ।


साथ रहें या न रहें,

यादों में , सांसों में बसी हैं ,

न भूल पायेंगे कभी हम,

चाँद, तारों सी झिलमिलाती,

अजर, अमर है सदा माँ ।



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