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Archana kochar Sugandha

Inspirational

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Archana kochar Sugandha

Inspirational

मां संपूर्णता की कड़ी होती हैं

मां संपूर्णता की कड़ी होती हैं

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गर्म साँसे हमारी चलती हैं

दिल माँ का धड़कता है। 


बवंडर हमारी जिंदगी में उठता है 

जिया माँ का तड़पता है। 


नींद हमें नहीं आती हैं 

जागती माँ रहती हैं। 


गल्तियाँ हम करते जाते हैं

आँचल में माँ छुपाती है। 


बेसुरे हो जाते हैं हमारे अल्फाज

माँ बन जाती हैं मधुर आवाज़।


खिलवाड़ होते हैं हमसे उनके जज्बात 

नज़र अंदाज करती हैं माँ, कोई नहीं हैं बात।


रिश्तो में स्वार्थ का रंग हम ही हैं भरते

भाप जाती हैं माँ की नजरें, 

कच्चा है रंग, देर नहीं लगेगी से इसे उतरते।


पढ़ कर हमारा चेहरा

माँ दुःख तकलीफों का लगा लेती है अंदाज

हर कर हमारी तकलीफें

बेखौफ देती है उड़ा 

मैं हूँ तुम्हारे पंख 

तुम मेरे परवाज़ ।


माँ छोटी बड़ी नहीं होती हैं

अधूरी जिंदगी को संपूर्णता से 

जोड़ने वाली कड़ी होती हैं।



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