STORYMIRROR

Deepika Kumari

Classics

4  

Deepika Kumari

Classics

मां की गोद

मां की गोद

1 min
24K

याद ना दिन भर तेरी आती

नानी मौसी खूब खिलाती

पर जब भी मुझे नींद सताती

मां तेरी ही गोद सुहाती


दिनभर करती हूं उत्पात

नहीं मैं सुनती किसी की बात

पर जब रात में निंदिया आती

मां तेरी ही गोद सुहाती


मुझे सुलाने को बाकी सब

करते रहते खूब प्रयास

पर मुझे कहीं भी चैन ना आता

वह आता बस मां के पास।


రచనకు రేటింగ్ ఇవ్వండి
లాగిన్

Similar hindi poem from Classics