Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Hasmukh Amathalal

Inspirational

3  

Hasmukh Amathalal

Inspirational

माँ की देन

माँ की देन

1 min
28


ना करो व्यक्त अपने अलफ़ाज़ ऐसे

आप हो पुष्प एक गुच्छ के

ना समझो इतने तुच्छ अपने आपको

रखो आस चूमने की आसमान को।


ना कोई बड़ा ना छोटा होता है

अपने आप में मस्त रहता है

ये तो है माँ की देन इंसान को

जो दिखाता है अपनी काबिलियत को।


ना किसी ने पाया है

अपनी माँ के कोख से

उसने उजाला है जीवन

अपने आप के अथाग प्रयास से।


मिल जाए यदि उसकी कृपा

जीवन सुखी रहे ओर राह सरल सदा

कर लो बुलंदी इतनी की

रहे रहेम सदा उसकी। 


रखो अपने आप में इतना भरोसा

ना देखो थाली में किसने परोसा

ये तो एक जज्बा है कविता का 

बहता है जल सदा सरिता का।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational