Gulab Jain
Abstract
वो जो अपनी माँ के पास होते हैं
उनके सारे लम्हें ख़ास होते हैं।
कितना महफूज़ है उनका जीवन,
जिन पे माँ के साये साथ होते हैं।
मुक़ाबला मुश्...
आँखों से बयां...
हसीन लम्हें.....
भर-भर के जाम ...
धड़कनें थमीं ...
दीपक और तूफ़ा...
कितने मजबूर य...
प्रेम के फूल....
स्वप्निल-सी भ...
निबाह ख़ारों स...
जैन धर्मी अनुयायी करे जैन धर्म चिंतन, हर्षोल्हास से मनाकर पर्युषण पर्व, दस धर्म दस द जैन धर्मी अनुयायी करे जैन धर्म चिंतन, हर्षोल्हास से मनाकर पर्युषण पर्व, दस ...
चॉक्लेट चूरन तेल साबुन खबरों वाले अब अख़बार नहीं होते। चॉक्लेट चूरन तेल साबुन खबरों वाले अब अख़बार नहीं होते।
जब मैं बोल भी नहीं पाता था.. सिर्फ़ मेरे इशारों से मैंने उन्हें हर ख्वाहिश पूरा करते दे जब मैं बोल भी नहीं पाता था.. सिर्फ़ मेरे इशारों से मैंने उन्हें हर ख्वाहिश पूर...
इसके प्रभाव से सामाजिक उत्थान हुआ एक दौड़ की परिधियों के पार हुई। इसके प्रभाव से सामाजिक उत्थान हुआ एक दौड़ की परिधियों के पार हुई।
नरान्तक और बिन्दुमती ने स्वर्ग की गति थी पाई। नरान्तक और बिन्दुमती ने स्वर्ग की गति थी पाई।
किसने आपको हक दिया है कुछ भी कह लेने का किसने आपको हक दिया है कुछ भी कह लेने का
हर दिल में होती है एक ख्वाबों खयालों की दुनिया । हर दिल में होती है एक ख्वाबों खयालों की दुनिया ।
लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कुत्ते लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कुत्ते। लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कुत्ते लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कु...
डरना छोड़ो अब हौसला भरो, लड़ो, कब तक मुँह चुराओगे। डरना छोड़ो अब हौसला भरो, लड़ो, कब तक मुँह चुराओगे।
पाँव अब रुकने नहीं हैं चाहे झँझावात हो। पाँव अब रुकने नहीं हैं चाहे झँझावात हो।
गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक महसूस किय गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक ...
यह कैसा आगाज है, जिसका दिखे न छोर। समय व्यर्थ होता रहे, हो जाता मन बोर। यह कैसा आगाज है, जिसका दिखे न छोर। समय व्यर्थ होता रहे, हो जाता मन बोर।
दे जाती है मुझे शब्द और मेरी कल्पना का अविरल रूप बन जाती है। दे जाती है मुझे शब्द और मेरी कल्पना का अविरल रूप बन जाती है।
कई शासक तो युद्ध शिविरों में, करते शामिल नच लड़कियों को, कई शासक तो युद्ध शिविरों में, करते शामिल नच लड़कियों को,
सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं
ये पिंजरा ना भाता मुझको मुझे तिनकों का नीड़ बनाने दो ये पिंजरा ना भाता मुझको मुझे तिनकों का नीड़ बनाने दो
तेरा बुत बनू और बंद रहूँ मंदिर के तालों में, तेरा बुत बनू और बंद रहूँ मंदिर के तालों में,
प्यार लुटाने वाला ही जग में आकाश कहा जाता है। प्यार लुटाने वाला ही जग में आकाश कहा जाता है।
नारायण के भक्त अरु, गंगा के सुत वीर। कृपा आपनी कीजिए, प्रमुदित रहे शरीर।। नारायण के भक्त अरु, गंगा के सुत वीर। कृपा आपनी कीजिए, प्रमुदित रहे शरीर।।
मैं कहाँ ले जाऊँ मन मेरा... तुझसे बिछड़ने को तैयार नही... मैं कहाँ ले जाऊँ मन मेरा... तुझसे बिछड़ने को तैयार नही...