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अनिल श्रीवास्तव "अनिल अयान"

Abstract

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अनिल श्रीवास्तव "अनिल अयान"

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मां है तो....

मां है तो....

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मां है तो यह परिवार है।

मां है तो सब संस्कार है।


मां है तो सारी ममता है।

सदस्यों में बनी समता है।

मां है तो प्रेम मनुहार है।

मां को सब स्वीकार है।


मां से हर कुल प्रतिष्ठा है।

मां पर सभी की निष्ठा है।

मां से रसोई अन्नपूर्णा है।

मां में ईश्वर क्या ढूंढना है।


मां से बच्चों का साथ है।

मां के बिन सब अनाथ हैं।

मां है तो सारे पकवान है।

मां के रूप में भगवान है।


मां से हर परिवार अटूट है।

मां से बच्चों को सब छूट है।

मां है तो रोशन शम्मां है।

हर स्त्री में रहती एक मां है।


मां के लिए हर पल समर्पित है।

मां को श्रद्धा सुमन अर्पित है।

मां के बिना घर, एक मकान है।

मां हर परिवार के लिए बागबान है।



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