Click Here. Romance Combo up for Grabs to Read while it Rains!
Click Here. Romance Combo up for Grabs to Read while it Rains!

Vijay Kumar उपनाम "साखी"

Tragedy Inspirational


4.5  

Vijay Kumar उपनाम "साखी"

Tragedy Inspirational


लोकडाउन में सुधार

लोकडाउन में सुधार

1 min 10 1 min 10

इस लोकडाउन मे जल रहा हूं

बिना पानी के आंखे मल रहा हूं

जब से लगा है ये लोकडाउन,

तब से में खुद से ही लड़ रहा हूं


ना खुलता है अब कोई बाज़ार,

हर कोई हो गया है अब लाचार,

इस लोकडाउन मे दहल रहा हूं

हर चीज़ के लिये तरस रहा हूं


सब सपने अब धूमिल हो गये है,

आज हर फूल ही शूल बन गये है,

इस लोकडाउन में ढल रहा हूं

बिना आईने की शक़्ल बन रहा हूं


फिऱ भी में जिंदा हूं,यही काफ़ी है

इस लोकडाउन में सबक ले रहा हूँ

इस दर्द से दवा का काम ले रहा हूं

इस लोकडाउन संतोषी हो रहा हूं


अब रहूंगा सदा ही साफ-सुथरा,

काम न करूँगा अब कोई बुरा,

इस लोकडाउन में सुधर रहा हूं

जरूरतों को कम कर रहा हूं


अपनी ख़ुदी से खुद बदल रहा हूं

इस लॉकडाउन में निखर रहा हूं।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Vijay Kumar उपनाम "साखी"

Similar hindi poem from Tragedy