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Lakshman Jha

Abstract

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Lakshman Jha

Abstract

" ललकार "

" ललकार "

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दुन्दुभी

बजने लगा ,

विजय -पर्व का

पताका

फहरने लगा ,

नगाड़ा बजने लगा ,शत्रुओं

में डर

सदा बसने लगा !

हम न छोड़ेंगे कभी

उन शत्रुओं को ,

पदतल कुचलना है

हमें उन उदंडियों को !!

है... हमारी कामना

हो विजय

सब की यहाँ पर !

शौर्य की गाथा

लिखें हम भाल पर !!

हे प्रभु !

हमें तुम शक्ति देना

हम बुराइयों

से सदा लड़ते रहें कल्याण सबका

हो जगत में

और हम सदा

साधक बनें !!



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