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Dharm Veer Raika

Inspirational

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Dharm Veer Raika

Inspirational

लक्ष्य तू कितना अटल......।

लक्ष्य तू कितना अटल......।

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एक जेब में तेरी सारी इच्छा,

एक कमरे में तेरी सारी अनिच्छा,

कैसे बाहर निकालो इनको,

जो कभी दिखाई नहीं देते, जिनको 

लक्ष्य तू कितना अटल....।


कितनों से जंग लड़नी पड़ती है,

कितनों से पानी का मग पीना पड़ता है,

घूँट -घूँट कर जीता हूं, लक्ष्य 

बूंद बूंद पानी पीता हूं।

लक्ष्य तू कितना अटल....।


ना पथ मुझे मालूम, लक्ष्य 

ना मालूम मुझे तेरी बस,

पता नहीं तुम कौन से फल का रस,

आम में तू मिलता नहीं पपीता में तू जीता नहीं।

लक्ष्य तू कितना अटल....।


कितने मोड़ आएंगे तेरे पथ में,

कितने रोड़ो पर जाएंगे तेरे रथ में,

कितनों ने भरमाया मुझे ,

पर एक ही शब्द फरमाया मुझे, मेहनत 

लक्ष्य तू कितना अटल.....।


जब तक रुकूंगा नहीं,

तब तक तो मिलेगा नहीं,

जब तक तू साथ निभाएगा,

तब तक मैं जो झुकूंगा नहीं।

लक्ष्य तू कितना अटल....।


लक्ष्य तेरी कितनी सीढ़ियां है,

कितनी इच्छाएं है मेरी,

रखना तू इनकी लाज,

मैं आऊंगा कभी तेरे बाज।

लक्ष्य तू कितना अटल......।


बाजी मारना ताश की पत्ती से,

जीतूंगा मैं ही तेरी गति से,

पहचान लिया हूं तेरी गति को,

फेंकूंगा में ही ताश की पत्ती को।

लक्ष्य तू कितना अटल.......।


मैं हूं इस देश का युवा,

कितनों से खेलता हूं जुआ,

अटल रखता हूं हौसला,

अन्यथा चिड़िया भी बनाती है अपना घोंसला।

लक्ष्य तू कितना अटल.......।


नाम में तेरे ढाई शब्द,

पर तेरे को कुछ नहीं बोलता, अपशब्द

क्यों करता है तू मेरे से गुस्सा,

मैं ही करूंगा तेरी सुरक्षा।

लक्ष्य तू कितना अटल.......।


रखता हूं तेरे काम में रुचि,

बनाता हूं दिन-रात तेरी सूची,

क्यों करता है परेशान मेरे, बैल

अब मैं ही चलाऊंगा तेरी, रेल

लक्ष्य तू कितना अटल.......।



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