STORYMIRROR

Dharm Veer Raika

Abstract

3  

Dharm Veer Raika

Abstract

यादें.....

यादें.....

1 min
128

टूट रही जवानी की बाते कैसे तुमको कह दूं

क्यों नही सुनती मेरी बाते मैं प्रखर चढ़ गया ,

खो गया जब तुम गायब थे सपने में गाया,

मेरा बचपन था तेरी जवानी तुम अपने को भूल गए 

खुशी से मैं झूमने लगता वो मेरा इज़हार था

मैं भी आशिक था तेरी दीवानगी का

ऊंचे महलों में आशियां बना लिया,

सीढियां भी नहीं गिन पा रहा हूं,

फिर भी अपना बना लिया,

कैसे मिलन होगा हमारा,

सच तो यह है कि मोहब्बत ने तुमको चुन लिया I


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract