Antariksha Saha
Tragedy
लिखूं तो क्या लिखूं
सब कुछ तो तुम जानते हो
ज़िन्दगी के इस छोर में
सब बेगाने कभी अपने ही तो थे।
चोट परायों ने नहीं
अपनो ने दी
अब और क्या लिखूं मैं
सब कुछ तोह तुम जानते हो।
मूरत
घाव कुछ गहरे ...
ख़ामोशी
मजदूर
झूठी मुस्कान
लक्ष्य
फ़ोन नंबर
मीठी चासनी
घर
angrayian
शहर की आब-ओ-हवा है ठीक नही तुम अभी आना नही। शहर की आब-ओ-हवा है ठीक नही तुम अभी आना नही।
न जाने क्यों मिलने पर हमारे ऐतराज़ था बहुत ज़माने को शामिल हो गए सारे एक तरफ और रौंद डाला प्या... न जाने क्यों मिलने पर हमारे ऐतराज़ था बहुत ज़माने को शामिल हो गए सारे एक तरफ...
आज जब सदियों की खोज के बाद उसने ढूंढ़ लिया है 'ना ' शब्द। आज जब सदियों की खोज के बाद उसने ढूंढ़ लिया है 'ना ' शब्द।
कुछ टूट रहा था, कुछ छूट रहा था, लेखन से नाता टूट रहा था। कुछ टूट रहा था, कुछ छूट रहा था, लेखन से नाता टूट रहा था।
मेरी चीखों से तुम्हें सुख मिलता है ऐसा तुम कहते हो मेरी चीखों से तुम्हें सुख मिलता है ऐसा तुम कहते हो
पंक्तियों की प्रेरणा बेच दी जब जाती है, वह रमणी कोठे पर रात भर वीर्य से नहाती है। पंक्तियों की प्रेरणा बेच दी जब जाती है, वह रमणी कोठे पर रात भर वीर्य से नहात...
सात दिनों के सात रंग में रंगी हुई इसकी प्रेम कहानी है। सात दिनों के सात रंग में रंगी हुई इसकी प्रेम कहानी है।
मेरे जैसा कहा मिलेगा तुम मुझसे यह कहते थे अब के है जो साथ तुम्हारे, तुम ही बताओ कैसा है मेरे जैसा कहा मिलेगा तुम मुझसे यह कहते थे अब के है जो साथ तुम्हारे, तुम ही बताओ...
अब स्वतंत्र है वो तो पराश्रित मैं भी नहीं इस अर्थहीन पानी का अर्थ कुछ भी नहीं। अब स्वतंत्र है वो तो पराश्रित मैं भी नहीं इस अर्थहीन पानी का अर्थ कुछ भी नहीं...
अगन लगी हुई है,मेरे इस हृदय के बहुत भीतर। अगन लगी हुई है,मेरे इस हृदय के बहुत भीतर।
दूर कहीं दिख रहा था एक अस्थि पिंजर, जिस पर रह गया था बस मॉंस चिपक कर। दूर कहीं दिख रहा था एक अस्थि पिंजर, जिस पर रह गया था बस मॉंस चिपक कर।
पराई भाषा को दिया मान,, अपनी भाषा को माना कूड़ेदान। पराई भाषा को दिया मान,, अपनी भाषा को माना कूड़ेदान।
यह मन के जुगनू हमें कभी अस्त व्यस्त तो कभी मस्त मस्त रखते हैं। यह मन के जुगनू हमें कभी अस्त व्यस्त तो कभी मस्त मस्त रखते हैं।
मेरे हिंदू मुस्लिम बच्चों को आपस में लड़ाया जाता है मेरे हिंदू मुस्लिम बच्चों को आपस में लड़ाया जाता है
नाराज हूँ...!! उन तमाम बच्चों से जो फ्रस्ट्रेशन में आकर खो देते हैं अपना जीवन। नाराज हूँ...!! उन तमाम बच्चों से जो फ्रस्ट्रेशन में आकर खो देते हैं अप...
क्या खूब लिखा है कवी ने प्यार, इश्क, मोहब्बत और जज्बात के बारे में... लेकिन एक कसक सी उठती ही है सीन... क्या खूब लिखा है कवी ने प्यार, इश्क, मोहब्बत और जज्बात के बारे में... लेकिन एक क...
पुस्तकों में जो कुछ वर्णन पढ़ा था उससे भी भीषणतम क्रूर कलियुग है। पुस्तकों में जो कुछ वर्णन पढ़ा था उससे भी भीषणतम क्रूर कलियुग है।
कौन देश के वासी तुम बादल चले कहाँ होकर तैयार ? कौन देश के वासी तुम बादल चले कहाँ होकर तैयार ?
आज फिर तेरे तसव्वुर ने नींद को इन आँखों से रूख़्स्त किया है। आज फिर तेरे तसव्वुर ने नींद को इन आँखों से रूख़्स्त किया है।
आखिर क्यों लाखों परिवार न्याय से वंचित रह जाते है। आखिर क्यों लाखों परिवार न्याय से वंचित रह जाते है।