Anup Gajare
Tragedy
कितना मुश्किल होता है
पानी पर तुम्हारा ..
हाँ तुम्हारा, नाम लिखना
मेरे लिए
हाँ मेरे लिए तुम आग को चूमती थी,
और मैं
हूँ की..
पानी पर तुम्हें नहीं लिख सकता।
ट्रैफ़िक पुलि...
विवशता
"अंत की दुनिय...
इजाजत
शब्द
वो अब नहीं हो...
लिखना
'बारिश'
गुमसुम किसी कोने में मन ही मन बिलखती रहती है ! गुमसुम किसी कोने में मन ही मन बिलखती रहती है !
परिंदा भी नज़र न आ रहा, बची सिर्फ निर्जनता की परछाई परिंदा भी नज़र न आ रहा, बची सिर्फ निर्जनता की परछाई
फिर भी एक आवाज उसके कानों तक जाता होगा फिर भी एक आवाज उसके कानों तक जाता होगा
प्यार का समंदर बहाता हूं तेरे लिये, तू प्यार की नदियाँ बनती ही नहीं, प्यार का समंदर बहाता हूं तेरे लिये, तू प्यार की नदियाँ बनती ही नहीं,
बर्फीली साँस चुरा लेती है गर्मी, चूल्हे की आग भी हो पड़ी ठंडी तो। बर्फीली साँस चुरा लेती है गर्मी, चूल्हे की आग भी हो पड़ी ठंडी तो।
वो पैगाम कहाँ से मैं लाऊँ? वो पैगाम कहाँ से मैं लाऊँ?
मैंने खुद को महसूस किया है, उस सूखे तालाब की तरह, मैंने खुद को महसूस किया है, उस सूखे तालाब की तरह,
रिम झिम बूंदों से इश्क बहा, दिल रोया पर आँखें हंसी रिम झिम बूंदों से इश्क बहा, दिल रोया पर आँखें हंसी
पर, जब कभी आपका उनके यहां जाना होता है, पर, जब कभी आपका उनके यहां जाना होता है,
इस तरह सिर्फ फासले बढ़ते गए और यूं जिंदगी से हम हारते रह गए। इस तरह सिर्फ फासले बढ़ते गए और यूं जिंदगी से हम हारते रह गए।
क्यों, जीवन की बातों में उलझ जाता ? क्यों, जीवन की बातों में उलझ जाता ?
अहसान भी तो उतारना होगा इतनी से एनर्जी कहां आती है भैय्या अहसान भी तो उतारना होगा इतनी से एनर्जी कहां आती है भैय्या
ज़मीन पर इन पत्थरों को थोड़ा उठा के तो देख। ज़मीन पर इन पत्थरों को थोड़ा उठा के तो देख।
अपने स्कूल के बच्चों से उसे कोई मतलब नहीं, अपने स्कूल के बच्चों से उसे कोई मतलब नहीं,
कैसे चालीस बसंत बीते उत्सव उदास और मन फीके कैसे चालीस बसंत बीते उत्सव उदास और मन फीके
तुम तब अपने लगते थे, क्योंकि तब मुझको अपना समझते थे, तुम तब अपने लगते थे, क्योंकि तब मुझको अपना समझते थे,
जाने क्या कल को ,जिंदगी का फैसला होगा। जाने क्या कल को ,जिंदगी का फैसला होगा।
खून पसीने एक कर जुटाता निवाले मेरा खुदा कभी भूखा सोने नही देता। खून पसीने एक कर जुटाता निवाले मेरा खुदा कभी भूखा सोने नही देता।
दूर दृष्टि और नजदीकी के फासलों से तो हम वाकिफ़ हैं दूर दृष्टि और नजदीकी के फासलों से तो हम वाकिफ़ हैं
उसके किस्से को हर मशहूर अख़बार लिख देगा, तुम्हारे आंसू देख हर कोई रोएगा, उसके किस्से को हर मशहूर अख़बार लिख देगा, तुम्हारे आंसू देख हर कोई रोएगा,