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मानव सिंह राणा 'सुओम'

Tragedy

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मानव सिंह राणा 'सुओम'

Tragedy

लाचार आदमी

लाचार आदमी

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आज कैसा हो गया है लाचार आदमी।

बनकर भाग रहा है मोटर कार आदमी।


ज़ब जताना था प्यार दिखाता गुस्सा।

प्यार का करने लगा है व्यापार आदमी।


स्याना बनकर बाँध बैठा अपने ही हाथ।

कब का खो चुका है व्यवहार आदमी।


पैसो के पीछे भागना फ़ितरत बन गई।

हाय कैसा हुआ है अब लाचार आदमी।


तुम ही हो सब कुछ, गलती है 'सुओम'।

अपना ही खा गया है सदाचार आदमी।


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