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Bhawna Kukreti Pandey

Tragedy Fantasy

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Bhawna Kukreti Pandey

Tragedy Fantasy

क्यों लिखना

क्यों लिखना

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किसी किसी समय

एक सोच अक्सर मेरी

उमंग को बांध देती है,

कि फायदा क्या है

इस तरह तुझको

लिखने का।


किस लिए

मन में बादलों से

उमड़ते घुमड़ते भावों को

लपेटना और कस देना

एक धागे में

तकली की तरह।


और ये बहुरंगी

कच्चा पक्का धागा

जिसे तलब होती है

सिलने की जिस्म ख्वाबों का

हकीकत की डांडी पर

समय की सुई से।


यूँ भी तो

जैसे आना था

वैसे ही तो है जाना

फिर क्यों लिखना

लिखते जाना।


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