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Ritu Garg

Inspirational

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Ritu Garg

Inspirational

क्यों भागते हो

क्यों भागते हो

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क्यों भागते हो ....

जरा सुकून से बैठो।


जिंदगी की दौड़-धूप में

क्यों विचलित रहते हो 

जरा सुकून से बैठो।


बच्चों के पास बैठो 

मन की बात करो

 जरा सुकून से बैठो।


करना है नित्य कर्म

 और सेवा भाव भी

 जरा सुकून से बैठो।


मन की उलझन को 

तुम समेट कर रखो

 जरा सुकून से बैठो।


जीवन में है मुश्किलें भी

उन जंजीरों को तोड़ो

 जरा सुकून से बैठो।


मिला है बल बुद्धि भी

 धैर्य रखकर तुम

जरा सुकून से बैठो।


मिलता नहीं कुछ

 परिश्रम के बिना

 जरा सुकून से बैठो।


प्रताड़ित मत करो

तारीफ ,वात्सल्य दो 

जरा सुकून से बैठो।


रहने दो अपनों को अपने में

बीज कटुता के मत बोओ

जरा सुकून से बैठो।


मिला है जीवन जीने को

फूल खुशी के खिलाओ

जरा सुकून से बैठो।


सांसें ही सांसों का आधार 

तुम इसे पहचान जाओ 

जरा सुकून से बैठो।


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