कवि मन जो कहता है
कवि मन जो कहता है
कवि मन जो कहता है
कवि मन जो कहता है
वही कागज पर उतरता है
लिखते रहते है जो
मंजर आंखों से दिखता है
धूप हो या छांव
लिखना होता है हर भाव
महक उठते है वो पल
जब रौशन होते है लफ़्ज़ के बोल
पंछीयो की चहचहाट
सपनों की जगमगाहट
अतीत का किनारा
भविष्य का सहारा
वर्तमान का वजूद
पहचान की पहचान
यही बात है आसान
शब्दों से मिलता है पयाम
कवि मन जो कहता है
वही कागज पर उतरता है
