STORYMIRROR

Pranali Kadam

Drama

3  

Pranali Kadam

Drama

कुसूर अपना था

कुसूर अपना था

1 min
258

सच तो ये है कि कुसूर अपना था,

चाँद को छूने कि तमन्ना की।


आसमां को जमीन पर माँगा,

फूल चाहा कि पत्थोरों पे खिलें।


कांटों में खिले फूलों की तलाश,

आरजू थी आग ठंडक देगी,


और बर्फ में ढूँढ़ते रहें उम्मीद,

ख्वा़ब जो देखा चाहा, सच हो जायें।


इसकी हमें सजा मिलनी थी

सच तो ये है कुसूर अपना था।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama