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डाॅ सरला सिंह "स्निग्धा"

Inspirational

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डाॅ सरला सिंह "स्निग्धा"

Inspirational

कुण्डलिया

कुण्डलिया

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जब तक तन में साँस है, करना तुम सत्काम। 

मिलती मन को शान्ति है, और जगत में नाम।


और जगत में नाम, भलाई सबकी करना।

झरता जैसे नीर, बिना स्वार्थ के झरना।


कहती सरला बात, किया हो जो भी अबतक। 

करना पर उपकार, प्राण काया में तब तक।।


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