डाॅ सरला सिंह "स्निग्धा"
Inspirational
रंग बरसता होली में देखो
बिन बादल हर आंगन में।
दिल उपवन है खिला हुआ
बगिया जैसे हो सावन में।
कंठ कंठ संगीत सजा है
ये राग रंग मन भावन है।
है गली गली उत्साह पर्व
आया उत्सव यह पावन है।
बेटी
योग दिवस
कुछ दोहे आध्य...
कुण्डलिया
कु्ण्डलिया
आशा
बारिश की आस
रंग
3 कुण्डलियां
राम
देश के शहीदों को कर लो नमन। इनसे सुरक्षित है अपनो वतन। देश के शहीदों को कर लो नमन। इनसे सुरक्षित है अपनो वतन।
तुमसे सीखा सबकुछ, मैने, क्योंकि तुम माता हो ।। तुमसे सीखा सबकुछ, मैने, क्योंकि तुम माता हो ।।
लम्बी लम्बी लगी है कतारें। मैया के द्वारे में हो रई पुकारें। लम्बी लम्बी लगी है कतारें। मैया के द्वारे में हो रई पुकारें।
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, आपस में सब भाई-भाई। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, आपस में सब भाई-भाई।
अपनी जा धरती परम पावन, सुंदर है दृश्य जा के मनभावन। अपनी जा धरती परम पावन, सुंदर है दृश्य जा के मनभावन।
पिता घर की धरोहर,घर का मान हैं ; पिता घर की शान,घर का सम्मान हैं । पिता घर की धरोहर,घर का मान हैं ; पिता घर की शान,घर का सम्मान हैं ।
चौरासी के बाद में पायो, हमने मानव शरीर। चौरासी के बाद में पायो, हमने मानव शरीर।
मै नारी हूं। जरूरत पड़ने पर तुम्हारी हूं। मै नारी हूं। जरूरत पड़ने पर तुम्हारी हूं।
सुख और दुख भी अनवरत आना जाना लगा रहता है सुख और दुख भी अनवरत आना जाना लगा रहता है
बस में नहीं है आज जज्बात तेरे मेरे कल की बातें कैसे दास्तान करूँ बस में नहीं है आज जज्बात तेरे मेरे कल की बातें कैसे दास्तान करूँ
जब तक है,कोरोना, कोई न ढील देंगे। टीका लगवायगें, सुरक्षा कवच देंगे। जब तक है,कोरोना, कोई न ढील देंगे। टीका लगवायगें, सुरक्षा कवच देंगे।
अपने लोगों से नाता न तोड़ना सबसे मिल-जुलकर रहना तुम अपने लोगों से नाता न तोड़ना सबसे मिल-जुलकर रहना तुम
मैं अपने ही प्रश्नों से खुद हीं अनुत्तरित हो जाता हूं मैं अपने ही प्रश्नों से खुद हीं अनुत्तरित हो जाता हूं
दुश्मनी पड़े महंगी , जरा सोच के करना | दुश्मनी पड़े महंगी , जरा सोच के करना |
सच्चे गुरु की तलाश में,छान लिया संसार। ऐसा रहबर कब मिले, करे मेरा उद्धार। सच्चे गुरु की तलाश में,छान लिया संसार। ऐसा रहबर कब मिले, करे मेरा उद्धार।
कुछ देर रुकने के बाद, फिर से चल पड़ना दोस्त ! कुछ देर रुकने के बाद, फिर से चल पड़ना दोस्त !
हर झगड़े में शामिल हूँ पर मैं कोई हथियार नहीं हूँ। हर झगड़े में शामिल हूँ पर मैं कोई हथियार नहीं हूँ।
राम कृष्ण की पावन धरती। गंगा-जमुना की धारा बहती। राम कृष्ण की पावन धरती। गंगा-जमुना की धारा बहती।
एक सफर से शुरू होकर एक सफर पर खत्म होता है एक सफर से शुरू होकर एक सफर पर खत्म होता है
गांव की मिट्टी की बात निराली है यहां रिश्तो में अपनापन प्यार और कुर्बानी है. गांव की मिट्टी की बात निराली है यहां रिश्तो में अपनापन प्यार और कुर्बानी है...