डाॅ सरला सिंह "स्निग्धा"
Inspirational
रंग बरसता होली में देखो
बिन बादल हर आंगन में।
दिल उपवन है खिला हुआ
बगिया जैसे हो सावन में।
कंठ कंठ संगीत सजा है
ये राग रंग मन भावन है।
है गली गली उत्साह पर्व
आया उत्सव यह पावन है।
बेटी
योग दिवस
कुछ दोहे आध्य...
कुण्डलिया
कु्ण्डलिया
आशा
बारिश की आस
रंग
3 कुण्डलियां
राम
गुरूदेव तुम्हारे चरणों में, बसे हैं चारो धाम। नमन मेरा स्वीकार करो! गुरूदेव तुम्हारे चरणों में, बसे हैं चारो धाम। नमन मेरा स्वीकार करो!
'सत्य' उजालों को फैला देंगे इतना, अंधियारों की नींद उड़ाकर छोड़ेंगे। 'सत्य' उजालों को फैला देंगे इतना, अंधियारों की नींद उड़ाकर छोड़ेंगे।
तनिक रुक, सोच और खुद में झाँक, तू ही शैतान, तुझ में ही राम ! तनिक रुक, सोच और खुद में झाँक, तू ही शैतान, तुझ में ही राम !
हर महफ़िल से अनजाना हूं मैं अपनी ही मौज का तराना हूं। हर महफ़िल से अनजाना हूं मैं अपनी ही मौज का तराना हूं।
तुझसे मेरी सांसे आ रही है थकान तुझसे, वीराने में बहार आ रही है। तुझसे मेरी सांसे आ रही है थकान तुझसे, वीराने में बहार आ रही है।
अब मौत का मंज़र, जीने की अब किसको पड़ी है ये दुनिया.........। अब मौत का मंज़र, जीने की अब किसको पड़ी है ये दुनिया.........।
सिलना चाहता हूं किफायत से ताकि औरों के लिए भी कुछ बचा सकूं। सिलना चाहता हूं किफायत से ताकि औरों के लिए भी कुछ बचा सकूं।
पिता! मिश्रित भाव जो दिखाते बाह्य से कठोरता और अंदर है ममता का सागर। पिता! मिश्रित भाव जो दिखाते बाह्य से कठोरता और अंदर है ममता का सागर।
यही समय है उसे मेहतर हो जाना होगा। यही समय है उसे मेहतर हो जाना होगा।
चल एक बार फिर से जी लेते हैं, ज़िन्दगी क्या होती है, फिर से समझ लेते हैं ! चल एक बार फिर से जी लेते हैं, ज़िन्दगी क्या होती है, फिर से समझ लेते हैं !
प्रेम की व्याख्या नहीं प्रेम की व्याख्या नहीं
मैं सब ले आई थी मन ही मन में तुम्हारा लहजा तुम्हारा व्यक्तित्व! मैं सब ले आई थी मन ही मन में तुम्हारा लहजा तुम्हारा व्यक्तित्व!
जीवन की नैया पार करो अपने मंसूबों को हासिल करो। जीवन की नैया पार करो अपने मंसूबों को हासिल करो।
प्रण लो कि हम कभी पेड़ ना काटेंगे इस धरती को प्रदूषण से बचाएंगे। प्रण लो कि हम कभी पेड़ ना काटेंगे इस धरती को प्रदूषण से बचाएंगे।
जब मैं अपने बच्चों को वही सिखाता हूं जो विरासत में मिला। जब मैं अपने बच्चों को वही सिखाता हूं जो विरासत में मिला।
जैसे आवश्यकता अनिवार्य है हर अविष्कार को, वैसे ही अब यह अवसर है कि कोरोना की हार हो। जैसे आवश्यकता अनिवार्य है हर अविष्कार को, वैसे ही अब यह अवसर है कि कोरोना की ...
खींची है तेरी चोटी, आज भी कह कर चिढ़ता हूँ मैं तुझको मोटी खींची है तेरी चोटी, आज भी कह कर चिढ़ता हूँ मैं तुझको मोटी
जो हुई देर तो भार बढ़ जायेगा वो ब्याज विवाद बन उभर जायेगा। जो हुई देर तो भार बढ़ जायेगा वो ब्याज विवाद बन उभर जायेगा।
स्निग्ध रश्मियों से फिर नव मार्ग प्रशस्त होगा। स्निग्ध रश्मियों से फिर नव मार्ग प्रशस्त होगा।
अब हो रही प्राणरहित दुखी संतप्त, तुम बालकों की करनी पर अब हो रही प्राणरहित दुखी संतप्त, तुम बालकों की करनी पर