STORYMIRROR

Bhoop Singh Bharti

Abstract

4  

Bhoop Singh Bharti

Abstract

कुण्डलिया : "खुद पर रहे यकीन"

कुण्डलिया : "खुद पर रहे यकीन"

1 min
242

लेना आपत काल में, इक दूजे का साथ।

खुदा भरोसे ना रहे, देख जोड़ कर हाथ।

देख जोड़कर हाथ, वक्त को नहीं गवाना।

खुद पर रहे यकीन, श्रम से स्वेद बहाना।

बनकर खुद पतवार, नाव को अपनी खेना।

बन जाए फिर बात, साथ आपस का लेना।


     



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract