STORYMIRROR

shivendra 'आकाश'

Romance

4  

shivendra 'आकाश'

Romance

"कुछ टूटे ख्वाव"

"कुछ टूटे ख्वाव"

1 min
189

कागज की किश्ती बना सोच में चला था,

कि मिलेंगे वो रुखसत से उसी रास्ते पर,

जहाँ समंदर की लहरें पीड़ा बढ़ाएगी,

मेरे ख्वाव आकाश से इधर को झाकेंगे,

पानी की बूंदे हवा बन तन को छू जाएंगी,

तेरे नेक इरादे दरिया को बुलाते होंगे,

कि कुछ टूटे ख्वाव तेरे पास आते होंगें।।


मैं हवा में भटकता फिरता हूं, तू बाँध ले,

मेरे हिस्से के ग़मो को कुछ आधा बाँट ले,

आँखे ढूढ़ती है तारों को जमीं से अंबर में,

रात के अंधियारे में तू चाँद को साँध ले,

ख्याल तो आया होगा तुझे मेरा सफर में,

ये मेरी यादों के पन्ने तुझे सताते होंगे,

कि कुछ टूटे ख्वाव तेरे पास आते होंगें।।


वो अधूरे अल्फ़ाज़ कभी न फिर पूरे हुए,

झलके थे उसके जज़्बात न भूरे हुए,

याद है अब भी उसके न जाने की आवाजें,

दिल से दिल कह रहा था रिश्ते जुड़े हुए,

तेरे होने और खोने के ये जख्म है ताजे,

मगर यूँ मेरी खामोशी तुझे रुलाती होगी,

कि कुछ टूटे ख्वाव तेरे पास आते होंगें।।

          


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance