Pradip Hiwarkhede
Drama
वैसे कुछ खास तो नहीं हो तुम,
फिर भी क्यों तुमसे बात करने
को मन करता है,
तुम पास भी नहीं हो मेरे,
फिर भी तुमसे दूर,
ना जाने को क्यों,
मन करता है,।
जिने देना ए ज...
अफसाने..
बदसुलकी..
तेरी मेरी राह...
कशमकश
कुछ खास तो नह...
घमंड हैं क्या...
कभी कभी लगता ...
बेवजह तो नही ...
रुठे हैं
प्रकृति , पार्वती , सीता के रूप में आदरांजलि के लिए। प्रकृति , पार्वती , सीता के रूप में आदरांजलि के लिए।
हाँ, मेरी मेहबूबा बदल गई हाँ, मेरी मेहबूबा बदल गई ! हाँ, मेरी मेहबूबा बदल गई हाँ, मेरी मेहबूबा बदल गई !
डगमगाने लगा स्वर्ग सिंहासन, गगन मैं दानवों दी किलकारी हैं। डगमगाने लगा स्वर्ग सिंहासन, गगन मैं दानवों दी किलकारी हैं।
फासलों को मिटाने के लिए फैसलों पर बात ना करते, अगर वो लोग मेरी जगह होते.. फासलों को मिटाने के लिए फैसलों पर बात ना करते, अगर वो लोग मेरी जगह होते..
वादा है, हमारा हम सब से, वक्त से आगे, बढ़ कर दिखाएंगे। वादा है, हमारा हम सब से, वक्त से आगे, बढ़ कर दिखाएंगे।
उसके हिस्से की ख़ुशियाँ रौंदकर, ठहाके लगाते हैं झूम झूमकर। उसके हिस्से की ख़ुशियाँ रौंदकर, ठहाके लगाते हैं झूम झूमकर।
रहिए ना अब ऐसे भरम में मिलेंगे हम अब अगले जनम में रहिए ना अब ऐसे भरम में मिलेंगे हम अब अगले जनम में
अजीब थी वो सर्दी वाली बारिश की रात अजीब थी वो सर्दी वाली बारिश की रात
कान्हा का जन्मदिन है, ओ बड़ी धूम मची ब्रज में। कान्हा का जन्मदिन है, ओ बड़ी धूम मची ब्रज में।
इस ओर हर ओर, मैं देखूं जिस भी ओर, एक उत्सव सा लगता है। इस ओर हर ओर, मैं देखूं जिस भी ओर, एक उत्सव सा लगता है।
बढ़ते रहने का हर सफर जारी रखो... बढ़ते रहने का हर सफर जारी रखो...
संवाद करने भर के लिए स्त्री, क्यों आखिर शब्दावली तलाशती है. संवाद करने भर के लिए स्त्री, क्यों आखिर शब्दावली तलाशती है.
किसी की न कीजिए तलाश अब रुक जाइए करिये आराम बस ! किसी की न कीजिए तलाश अब रुक जाइए करिये आराम बस !
बहुत जल्द मेरी तुम्हारी अधूरी मोहब्बत से आखिरी मुलाक़ात होने वाली है। बहुत जल्द मेरी तुम्हारी अधूरी मोहब्बत से आखिरी मुलाक़ात होने वाली है।
धन, अनाज धातु उगाने का हुनर मुझे याद अब भी है। धन, अनाज धातु उगाने का हुनर मुझे याद अब भी है।
बिन मेरे भले ना दिन ढले, मैं लौट के अब ना आऊँगा। बिन मेरे भले ना दिन ढले, मैं लौट के अब ना आऊँगा।
माँ आज भी चूल्हे पर बैठी गुड़ की चाय बना रही है माँ आज भी चूल्हे पर बैठी गुड़ की चाय बना रही है
जिसे दिल से चाहोगे उसे खो मत देना, क्योंकि, फिर नाराज तुम मुझसे नहीं खुद से हो जाओगे जिसे दिल से चाहोगे उसे खो मत देना, क्योंकि, फिर नाराज तुम मुझसे नहीं खुद से ह...
प्यार में हमेशा कोई न कोई पागलपन होता है, परन्तु साथ ही हमेशा पागलपन में कुछ कारण भी प्यार में हमेशा कोई न कोई पागलपन होता है, परन्तु साथ ही हमेशा पागलपन में कुछ...
मुझे माफ करना जो तुमको रुलाया कभी भूले से तेरा दिल जो दुखाया मुझे माफ करना जो तुमको रुलाया कभी भूले से तेरा दिल जो दुखाया