Pradip Hiwarkhede
Abstract
जीने देना ए जिंदगी,
अपने हिसाब से,
क्यों बार-बार परेशान कर रही है,
उलझनें बढ़ा के,
हमने क्या बिगाड़ा है तेरा,
जो तू इतना कहर बरसा रही है।
अपने हिसाब से।
जिने देना ए ज...
अफसाने..
बदसुलकी..
तेरी मेरी राह...
कशमकश
कुछ खास तो नह...
घमंड हैं क्या...
कभी कभी लगता ...
बेवजह तो नही ...
रुठे हैं
और यह तलाश जारी है। और यह तलाश जारी है।
बंटे हैं लोग, अक्षरों और शब्दों में, सजे हैं लोग, ख़ूबसूरत कहावतों और मुहावरों से, बंटे हैं लोग, अक्षरों और शब्दों में, सजे हैं लोग, ख़ूबसूरत कहावतों और मुहावरों...
इन्हें तो केवल अपने मतलब की पतंग ही उड़ानी है। इन्हें तो केवल अपने मतलब की पतंग ही उड़ानी है।
कई रात मैंने तुम्हारी याद में सिर्फ जाग कर काटी है, कई रात मैंने तुम्हारी याद में सिर्फ जाग कर काटी है,
मुस्कुराता है वो, माँ के आँचल में, दोस्ती के जज़्बे में , चहकता है, मुस्कुराता है वो, माँ के आँचल में, दोस्ती के जज़्बे में , चहकता है,
कौन हूँ मैं! सोचा, तो घबरा गया। कौन हूँ मैं! सोचा, तो घबरा गया।
इस स्पर्श के अनुभव के साथ ही शेष जीवन गुनगुनाते हुए बिताना चाहता हूं। इस स्पर्श के अनुभव के साथ ही शेष जीवन गुनगुनाते हुए बिताना चाहता हूं।
फिर क्यों आज हम आप गुमराह हुए जाते हैं सब। फिर क्यों आज हम आप गुमराह हुए जाते हैं सब।
सुनहरे विचारों को संजोकर, एक ग़ज़ल की आस रखता हूं सुनहरे विचारों को संजोकर, एक ग़ज़ल की आस रखता हूं
पर क्या हमें ये भी पता है कि हम धरती के सबसे बुद्धिमान प्राणी हैं। पर क्या हमें ये भी पता है कि हम धरती के सबसे बुद्धिमान प्राणी हैं।
जिस प्रकार आईना सच दिखाता है, मैं सच देख लेता हूं। जिस प्रकार आईना सच दिखाता है, मैं सच देख लेता हूं।
ऊंचाइयों की गहराई देखते-देखते आनन्दमय चकित होती हूं तैरते-तैरते। ऊंचाइयों की गहराई देखते-देखते आनन्दमय चकित होती हूं तैरते-तैरते।
वो खुश दिखाई देता और अंतस के रंगों में गमगीन दिखता है. वो खुश दिखाई देता और अंतस के रंगों में गमगीन दिखता है.
जिंदगी किताब ही तो है जिसका एक अध्याय हर रोज शुरू होता है। जिंदगी किताब ही तो है जिसका एक अध्याय हर रोज शुरू होता है।
उसके जिंदा रहने के बहाने को, टूटी हुई स्त्रियां ...। उसके जिंदा रहने के बहाने को, टूटी हुई स्त्रियां ...।
उलझ गए हैं हम, अपनी जिम्मेदारियों में इस क़दर, उलझ गए हैं हम, अपनी जिम्मेदारियों में इस क़दर,
कभी तुम्हारी गर्म हथेलियों का स्पर्श महसूस होता है मरहम सा .... कभी तुम्हारी गर्म हथेलियों का स्पर्श महसूस होता है मरहम सा ....
सुनो तुम्हें बिना बताये लिये हैं कुछ संकल्प। सुनो तुम्हें बिना बताये लिये हैं कुछ संकल्प।
मनोकामना पूर्ण करें मंगला गौरी-शिव दूध जल से जो करें अभिषेक मनोकामना पूर्ण करें मंगला गौरी-शिव दूध जल से जो करें अभिषेक
उसके दुख- दर्द मेरे हवाले कर दे, सारे आजा़र से मेरे हमसफर को बचाना। उसके दुख- दर्द मेरे हवाले कर दे, सारे आजा़र से मेरे हमसफर को बचाना।