Pradip Hiwarkhede
Abstract
कुछ तो अफसाने
लिखती ए जिंदगी,
हमारे भी किरदार में,
ऐसे यूं तड़पके जीना अब,
अच्छा नहीं लगता।
जिने देना ए ज...
अफसाने..
बदसुलकी..
तेरी मेरी राह...
कशमकश
कुछ खास तो नह...
घमंड हैं क्या...
कभी कभी लगता ...
बेवजह तो नही ...
रुठे हैं
अजब रिवाजों वाला ही, है इस सारे जग का रोग, चलती को कहते हैं गाड़ी, अजब रिवाजों वाला ही, है इस सारे जग का रोग, चलती को कहते हैं गाड़ी,
रटता हुआ फिर राम-राम। धाम-का अर्थ यहाँ "घर" से है। रटता हुआ फिर राम-राम। धाम-का अर्थ यहाँ "घर" से है।
मोहब्बत कथानक हो गई मोहब्बत भूली यादों का आसरा हो गई। मोहब्बत कथानक हो गई मोहब्बत भूली यादों का आसरा हो गई।
रह ही जाती हैं ज़िंदगी में अक्सर कुछ अधूरी दास्ताँ। रह ही जाती हैं ज़िंदगी में अक्सर कुछ अधूरी दास्ताँ।
एक देश, एक विधान, एक संविधान सख्ती से लागू करता। एक देश, एक विधान, एक संविधान सख्ती से लागू करता।
शख्स को मिट जाना है, शख्सियत को अमरत्व पाना है। शख्स को मिट जाना है, शख्सियत को अमरत्व पाना है।
फिर से आज बनाना होगी खोई हुई पहचान को। याद करें हम.... फिर से आज बनाना होगी खोई हुई पहचान को। याद करें हम....
चीखों से अब सत्ता नहीं हिला करते कहने वाला गूँगा,सुनने वाला बहरा है। चीखों से अब सत्ता नहीं हिला करते कहने वाला गूँगा,सुनने वाला बहरा है।
हाँ ! मैं मुट्ठी भर रेत से इक मकान बनाऊँगा । हाँ ! मैं मुट्ठी भर रेत से इक मकान बनाऊँगा ।
बची है मकरंद की चंद बूंदें और सुवास भी अभी। बची है मकरंद की चंद बूंदें और सुवास भी अभी।
क्या जो अर्थ है इनका वो पूरा आज हो रहा।। क्या जो अर्थ है इनका वो पूरा आज हो रहा।।
जाड़ों का मौसम है आया छोटे दिन और लंबी रातें लाया। जाड़ों का मौसम है आया छोटे दिन और लंबी रातें लाया।
जीवन में सूनापन मगर मन में हलचल सी है, ठहर गयी धरती पर मन में कम्पन सी है, जीवन में सूनापन मगर मन में हलचल सी है, ठहर गयी धरती पर मन में कम्पन सी है,
कठिन से कठिन दौर भी पार कर जाते हैं वो हसीन पल हमारा हौसला बन जाते हैं। कठिन से कठिन दौर भी पार कर जाते हैं वो हसीन पल हमारा हौसला बन जाते हैं।
खत्म करना विश्व से करोना को और न विश्व में कोई महामारी फैलाना1 खत्म करना विश्व से करोना को और न विश्व में कोई महामारी फैलाना1
पूरे दिन की सिरदर्दी बाद चाय और बिस्कुट की शाम! पूरे दिन की सिरदर्दी बाद चाय और बिस्कुट की शाम!
मगर जीवन मिला नहीं बस मिट जाने को। हैं ये उपवन कुछ सौरभ बिखराने को। मगर जीवन मिला नहीं बस मिट जाने को। हैं ये उपवन कुछ सौरभ बिखराने को।
ग़ज़ल में तेरा कर के बयान हमनशीं शायरी अब धर्म की चमकने लगी। ग़ज़ल में तेरा कर के बयान हमनशीं शायरी अब धर्म की चमकने लगी।
ये जिंदगी आज मैं बहुत खुश हूँ। ये जिंदगी आज मैं बहुत खुश हूँ।
वैश्विक गरमी प्रभाव। उसी का चले पेंच दॉंव।। वैश्विक गरमी प्रभाव। उसी का चले पेंच दॉंव।।