कुछ हुआ
कुछ हुआ
कुछ हुआ
कुछ देर लगती है तो लगने दो
कुछ बूंदें बरसती हैं तो बरसने दो
कुछ राहें छूटती हैं तो छूटने दो
कुछ बातें चलती है तो चलने दो
कुछ अश्रु तो नैनों में अपने है
इन अश्रु के कारण चाहे जो है
कुछ पास है पर केवल परिहास है
फिर भी पाने को कुछ और की आस है ।
बारिश हुई कि खेत में बीज बोना है
देर से ही सही इंतजार तो करना है
ये बातें मन में भला कब तक रही है
ये राहें कब अपनी जगह से दूर हूई है ।
कुछ कर्म हुआ और मन में भ्रम हुआ
आंखो के कारण कुछ अजब हूआ
कुछ भुला कर सब कुछ याद हुआ
मन मुताबिक भला एक बार में कब काम हुआ ।
कुछ पल का प्रेम प्रसंग हुआ
हर पल इससे मन प्रसन्न हुआ
यह हवा बदली कि कुछ ऐसा हुआ
कुछ पल में कोई अपना पराया हुआ ।
कुछ बातें यादों के बीच याद आती रही
कुछ आहें सांसों के साथ चलती रही
कुछ देर हुई नहीं कि सवेरा जल्दी हुआ
कुछ बातें हुई नहीं कि झगडा़ जल्दी हुआ/
कुछ रातें बिन बातों के बीती
कुछ दिन बिन देख के रही
जब ख्याल वे मुलाकात का सोचा
तब सवाल ये हालात ने क्यों रोका/
कुछ ठहरा राही विश्राम को
देख सामने अपनी थकान को
कुछ राहतें पाने की तलाश में
मन का मौन खो गया गहरे विलास में/
कुछ देर लगती है तो ठहर जाओ
कुछ बूंदें बरसती हैं तो भीग जाओ
कुछ राहें छूटती हैं तो छोड़ आओ
कुछ बातें चलती है तो बातें कर आओ/
