STORYMIRROR

Vinay Panda

Tragedy

3  

Vinay Panda

Tragedy

कठपुतली

कठपुतली

1 min
379

हम कौन हैं

कोई नहीं जानता

हमारे इंसानियत का

वज़ूद क्या है

इसे कोई नहीं पहचानता।


कठपुतली बनकर

रह गयी है ज़िन्दगी सबकी

इन्सान अपने वश में ख़ुद नहीं

सिर्फ एक डोर के सहारे

वह है नाचता !


संस्कार, चरित्र

और धर्म को उसने

हो जैसे ताख पर सब रखा

जिसे देखो वही

गलत राह पर है खड़ा !


এই বিষয়বস্তু রেট
প্রবেশ করুন

Similar hindi poem from Tragedy