STORYMIRROR

Minal Aggarwal

Tragedy

4  

Minal Aggarwal

Tragedy

प्रेम की राह की ओर

प्रेम की राह की ओर

1 min
193

यह जाता जाता 

मौसम 

कुछ कहता है 

कोई आने वाला है 

यह कहता है 

तू सज धज के रहना 

तैयार 

एक सांझ के ढलते सूरज सी

नहीं 

एक रात के चांद की 

चांदनी सी रहना 

करके सोलह श्रृंगार 

रात में 

चांद के रथ पे सवार 

उतरेगा कोई 

ख्वाबों सा सुंदर राजकुमार 

तू उड़ जाना 

उसके संग 

किसी परियों के लोक

यहां इस लोक में 

रह जायेंगी

तेरी प्रेम भरी श्वासें

प्रेम भरे नगमे 

प्रेम के बीते कुछ पलों की 

स्मृतियां बनाती खुशबुएँ और 

प्रेम की राह की ओर 

बढ़ते तेरे मिटते हुए 

प्रेम के पद चिन्ह।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy