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Agam Murari

Crime

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Agam Murari

Crime

कत्ल

कत्ल

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सुबह सुबह एक चेतना फैल गई

फिज़ाओं में हवाओं की तरह

वीरान अहोदा में कत्ल हो गया

खून के धब्बे मिले है, घटाओ की तरह ।


किसने किया , क्यों किया

बड़े ही भले इंसान थे

उनकी छत्रछाया में जितने भी थे

उसके लिए वो भगवान थे।


एक बेटी कितना रोयी

पापा – पापा कह के

पापा लौट आओ मेरे

बस रह गया आंसू बह के ।


मां का हृदय फट गया ,

पत्नी कैसे रह पाएगी

आंखो की आदालत सब देखा

पर एक शव कुछ कह ना पाएगी।


चौखट राह देखता रह गया

अब द्वार वीरान रहेगी

रह गया तो , बस नाम दीवारों पर

इतने पैर चल रहे थे कि 

कौन आ गया यह, शमशान कहेगी।


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