STORYMIRROR

Burhan kadiyani .

Tragedy

3  

Burhan kadiyani .

Tragedy

कोरोना का आघात

कोरोना का आघात

1 min
201

इंसानी तारीख में

ऐसा वक़्त आया

सब होते हुए भी इंसान ने

खुद को बेबस पाया

काबा सूना हो गया


काशी में आरती का

समा थम गया

वेटिकन सुनसान हो गया

मस्जिदों में नमाज़ होना

बंद हो गया

ना रोज़गार, ना खुद का किरदार

ना भविष्य, ना पुराना साल


कुछ रहा ना ज़रूरी

एक संजीवनी, रखो सबसे दूरी

ना सुनना चाहे कोई गीता के श्लोक

ना सुनना चाहे कोई

कुरान की आयत

सबके कान तरसे सुनने को

एक ही बात

ख़तम हो गया,  

बर्बाद हो गया कोरोना का आघात



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy