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Burhan kadiyani .

Others

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Burhan kadiyani .

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टूटा आईना

टूटा आईना

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चलो ये किस्सा भी तमाम हुआ

किसी का आना किसी का जाना हुआ!

क्या हिसाब हो की

कौन आबाद या बर्बाद हुआ!


इंसान इतने सालों में कहाँ

इंसान हुआ!

मोहब्बत जिस्से की वो भी

कहाँ अपना हुआ!

अब हर अपना अब गैर से भी

गैर हुआ!

कोई नहीं कुछ कुछ बन पाया!

आखिर में आईना टुकड़े

टुकड़े हुआ बुरहान !



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