Vineeta Joshi
Romance
बरसे बादल चाहे जितना,
फिर भी प्यास जरूरी है,
मानो न मानो नमक के बाद,
थोड़ी मिठास जरूरी है
मिलते ही वो आँखें फेरे,
आज कोई तो बात जरूरी है।
या तुझे पता ह...
खोज
किसी से न कहो
तुम्हें खुद क...
इश्क़ वाली झपक...
कोई तो बात जर...
गुफ़्तगू
भ्रमजाल
तुम खुशियों के शीशमहल में, तुम मेरी तन्हाई में.. तुम खुशियों के शीशमहल में, तुम मेरी तन्हाई में..
तकिये से पूछो बारिश में मैं कितना अश्क बहाया था ! तकिये से पूछो बारिश में मैं कितना अश्क बहाया था !
तुम्हारी आहट पर मुझे कुछ पूर्णता का आभास तो हो। तुम्हारी आहट पर मुझे कुछ पूर्णता का आभास तो हो।
लड़का हूँ न allowed नहींं है आजकल के बाजार में। लड़का हूँ न allowed नहींं है आजकल के बाजार में।
"फूल" के लिए मोगरे के फूल लाया हूं बहारों से चुराकर थोड़ी महक लाया हूं। "फूल" के लिए मोगरे के फूल लाया हूं बहारों से चुराकर थोड़ी महक लाया हूं।
अर्ध मौन, अर्ध अभिव्यक्ति तुम तुम अर्ध प्रेम की भाषा। अर्ध मौन, अर्ध अभिव्यक्ति तुम तुम अर्ध प्रेम की भाषा।
तुम कहो तो तुम्हारे नाम एक गज़ल लिख दें बरस जाओगे क्या बेवजह तुम्हे बादल लिख दें। तुम कहो तो तुम्हारे नाम एक गज़ल लिख दें बरस जाओगे क्या बेवजह तुम्हे बादल लिख ...
नफरतों का हो कैसा भी आलम ऋषभ प्रेम नफरत में चाहत को भर जायेगा नफरतों का हो कैसा भी आलम ऋषभ प्रेम नफरत में चाहत को भर जायेगा
तूने छुआ जो रूह आ गई तो मुझे खुद से भी प्यार है। तूने छुआ जो रूह आ गई तो मुझे खुद से भी प्यार है।
मैं तो अपने को भूल रहा, तुम कर लेती हो याद मुझे। मैं तो अपने को भूल रहा, तुम कर लेती हो याद मुझे।
पर ये मुममिन नहीं और इसी तन्हाई में गुमसुन अकेला बैठा मैं। पर ये मुममिन नहीं और इसी तन्हाई में गुमसुन अकेला बैठा मैं।
वह कहानियाँ कहता था…मैं कहानियाँ सुनती थी… उसे व्हाईट रंग पसंद था और मुझे ब्लैक… वह कहानियाँ कहता था…मैं कहानियाँ सुनती थी… उसे व्हाईट रंग पसंद था और मुझे ब्लैक...
वो आज भी ख्वाबों में आता है!! जगाकर नींद से, यादों के भँवर में फँसा जाता है वो आज भी ख्वाबों में आता है!! जगाकर नींद से, यादों के भँवर में फँसा जाता ह...
जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो। जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो।
खिले पँखुरिया ज्यों गुलाब की , ऐसे अधर खिले तेरे ! खिले पँखुरिया ज्यों गुलाब की , ऐसे अधर खिले तेरे !
रे पागल मन यहाँ किसका हुआ तू दीवाना कैसे बताऊँ तुझे कितना ज़ालिम है ज़माना। रे पागल मन यहाँ किसका हुआ तू दीवाना कैसे बताऊँ तुझे कितना ज़ालिम है ज़माना।
अनुरागी लालिमा कपोलों पर छटा इंद्रधनुषी-सी खिल गई। अनुरागी लालिमा कपोलों पर छटा इंद्रधनुषी-सी खिल गई।
ख़त लिख रहा हूं, जिंदगी विरान है। ख़त में भरता हूं अक्स, ख़त लिख रहा हूं, जिंदगी विरान है। ख़त में भरता हूं अक्स,
बेशक तुम मत आना... बस कह देना की आऊंगा। बेशक तुम मत आना... बस कह देना की आऊंगा।
चलो हम-तुम फिर बैठ के सुबह की चाय एक साथ पीते हैं। चलो हम-तुम फिर बैठ के सुबह की चाय एक साथ पीते हैं।