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Shailendra Kumar Shukla, FRSC

Classics

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Shailendra Kumar Shukla, FRSC

Classics

कोई ऐसा क्यूँ होता है

कोई ऐसा क्यूँ होता है

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जब तक जीवन औ जान रहे 

निष्ठुरता और अभिमान रहे !

माया से भी मोह करे

पर मन मे तो अवसान रहे !!


कुन्थित और संकुचित होकर

क्या जीत सके या हार रहे !

जीवन में जीत सुनिश्चित है 

गर सच्चाई का साथ रहे!!


वो लोग जो बहुतायत मे हैँ

ना मन खोले औ याद करें !

तिरस्कार करें काबिल पौरूष 

हम उनका फिर क्यूँ ध्यान करें !!


ये याद रहे ऐ पावन मन 

जग नाटक भी है सुन्दर भी !

हमको कैसे सच् जीना है

इसका अनुभव बारम्बार रहे !


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