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Madhu Vashishta

Action Inspirational

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Madhu Vashishta

Action Inspirational

कन्यादान।

कन्यादान।

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सभी दानों में भारी कन्यादान।

किसी के भी घर में कन्या से बहुमूल्य कुछ भी ना मान।

कन्या ही है प्रत्येक घर की मान और शान।

भला कोई कैसे कर सकता है उसका दान?

जग की यह रीत है निभानी ही पड़ती है।

दो कुलों की मर्यादा कन्या के हाथ में थमानी पड़ती है।

दान करते हुए भी पात्रता का रखना पड़ता है ध्यान।

क्योंकि इस समय कोई वस्तु का नहीं अपितु हो रहा है कन्यादान।

वह पात्र कदापि नहीं हो सकता जिसको करना नहीं आता नारी का सम्मान।

अपनी पुत्रियों को सबल और लायक बनाओ।

उनमें वस्तु का नहीं अपितु

स्वयंसिद्धा का भाव जगाओ।

दान लेने वाला कभी दानी से बड़ा हो सकता नहीं।

इसलिए कन्यादान करने वाला रहेगा सदा पूजनीय ही।

यदि इस बात का है सबको ध्यान तो

फिर फर्क नहीं पड़ता कि हो रहा है विवाह, शादी, मैरिज या कन्यादान।


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