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chandraprabha kumar

Romance

3  

chandraprabha kumar

Romance

कल्पना

कल्पना

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कितनी बार सोचा

तुमको बतायें

ज़रा पास आओ

मुँह तो लाओ।

कुछ हम भी गुनगुनायें।

कभी हम पड़े हों

अपने में मस्त अकेले

या हों पास फिर

दो चार पत्र पत्रिका नवेले।

ऐसे में तुम आओ,

चुपके चुपके 

पग धरते आओ।

बुला लो पास में हमें

कि बस हम हैं तेरे

तेरे तेरे ।



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