कलम
कलम
कलम की ताकत तलवार लिखूं,
या बदल दे दुनिया वह वार लिखूं,
इतिहास को बदलते देखा है,
भीतर देशप्रेम फूंकते देखा है,
जोश भर देता है कुछ शब्दों का जोड़ तोड़,
बिखर जाता है मनोबल शब्दों पर करो गौर,
हाथ आया निवाला नहीं कुछ भी लगेगा पकने,
भविष्य ही बिखरने लगेगा जब कलम लगेगी थकने,
कल्पनाओं को सजीव करती कलम की ताकत है,
भविष्य की ओर बढ़ते कदमों की आती आहट है,
दोस्ती कर कलम से शब्दों को भरपूर संवारना,
फिर उन शब्दों से किसी आहत मन को सहलाना,
ताकत इसकी कभी तो आजमा कर भी देखो,
खुशियों की दौलत दोनों हाथों से लुटा कर तो देखो,
जो देते हैं वही वापस आते अक्सर देखा है,
मदद और मगरूर होने में बहुत ही बारीक सी रेखा है,
किसी को प्रेरणा किसी को उलाहना या अवहेलना,
संघात अपमान या सम्मान शब्दों से है खेलना,
कलम की ताकत बड़ी होती है तेज तलवार से,
घाव भर जाते हैं ऊपरी नहीं भरते कलम की तेज धार से,
रक्त उबाल सिंधु तरल लावा बन बहता नस नस में,
कलम की स्याही से लिख देना है चमकते भविष्य को..!
